42090: उत्करादिभ्यश्छः

Padacheda: उत्कर-आदिभ्यः | S | 5 | 3 |

छः | S | 1 | 1 |

Sutrartha


Vasu English Summary

The affix छ comes after the words उत्कर etc. in the four senses.

Vasu English Translation

The affix छ comes after the words उत्कर etc. in the four senses. As उत्करीयम्, शफरीयम् ॥

1 उत्कर, 2 संफल, 3 शफर, 4 पिप्पल, 5 पिप्पलीमूल, 6 अश्मन्, 7 सुवर्ण (सुपर्ण) 8 स्थलाजिन, 9 तिक, 10 कितव, 11 अणक, 12 त्रैवण, 13 पिचुक, 14 अश्वत्थ, 15 काश, 16 क्षुद्र (शकाक्षुद्र st. काश, क्षुद्र ) 17 भस्त्रा, 18 शाल, 19 जन्या, 20 अजिर (अजिन) 21 चर्मन्, 22 उत्क्रोश, 23 क्षान्त (शान्त) 24 खदिर, 25 शूर्पणाय, 26 श्यावनाय, 27 नैवाकव (नैव, बक) 28 तृष, 29 वृक्ष 30 शाक, 31 पलाश, 32 विजिगीषा, 33 अनेक, 34 आतप, 35 फल, 36 संपर, 37 अर्क, 38 गर्त, 39 अग्नि, 40 वैराणक, 41 इडा, 42 अरण्य, 43 निशान्त, 44 पर्ण, 45 नीचायक, 46 शंकर, 47 अवरोहित, 48 क्षार, 49 विशाल, 50 वेत्र, 51 अरीहण, 52 खण्ड, 53 वातागर 54 मन्त्रणार्ह, 55 इन्द्रवृक्ष, 56 नितान्तवृक्ष, (नितान्तावृक्ष; नितान्त, वृक्ष) 57 आर्द्रवृक्ष 58 तृणव, 59 मध्य, 60 मञ्च, 61 अर्जुनवृक्ष.

Kashika

उत्कर इत्येवमादिभ्यश्छः प्रत्ययो भवति चातुरर्थिकः। यथासंभवमर्थसंबन्धः। उत्करीयम्। शफरीयम्॥ उत्कर। संफल। शफर। पिप्पल। पिप्पलीमूल। अश्मन्। अर्क। पर्ण। सुपर्ण। खलाजिन। इडा। अग्नि। तिक। कितव। आतप। अनेक। पलाश। तृणव। पिचुक। अश्वत्थ। शकाक्षुद्र। भस्त्रा। विशाला। अवरोहित। गर्त। शाल। अन्य। जन्या। अजिन। मञ्च। चर्मन्। उत्क्रोश। शान्त। खदिर। शूर्पणाय। श्यावनाय। नैव। बक। नितान्त। वृक्ष। इन्द्रवृक्ष। आर्द्रवृक्ष। अर्जुनवृक्ष। उत्करादिः॥

Siddhanta Kaumudi

उत्करीयः ॥

Balamanorama

उत्करादिभ्यश्छः - उत्करादिभ्यश्छः । ‘चातुरर्थिक’ इति शेषः । उत्करीय इति । देशविशेषोऽयम् । उत्करेण निर्वृत्तमिति वा, तस्य निवासः, तस्य अदूरभव इति वा ।

Prakriyasarvasvam

उत्करीयो देशः । पिप्पलीयः ॥