32145: प्रे लपसृद्रुमथवदवसः =========================== **Padacheda:** प्रे | S | 7 | 1 | लप-सृ-द्रु-मथ-वद-वसः | S | 5 | 1 | Sutrartha --------- **** Vasu English Summary -------------------- The affix घिनुण् comes after the verbs 1. लप् 2. सृ 3. द्रु 4. मथ 5. वद् 6. वस् when compounded with the preposition वि। Vasu English Translation ------------------------ The affix घिनुण् comes after the verbs 1. लप् 2. सृ 3. द्रु 4. मथ 5. वद् 6. वस् when compounded with the preposition वि। As प्रलापी 'prattling'; प्रसारी 'extending around'; प्रद्रावी 'running away, fugitive'; प्रमाथी 'tormenting'; प्रवादी 'reporting'; प्रवासी 'a traveller'. The root वस् here is the *Bhvadi* वस् meaning 'to dwell' and is not *Adadi* meaning 'to cover', because in the latter the *vikarana* is elided. Kashika ------- प्र उपपदे लपादिभ्यो घिनुण् भवति। प्रलापी। प्रसारी। प्रद्रावी। प्रमाथी। प्रवादी। प्रवासी। वस इति **वस निवासे** इत्यस्य ग्रहणं नाच्छादनार्थस्य, लुग्विकरणत्वात्॥ Siddhanta Kaumudi ----------------- प्रलापी । प्रसारी । प्रद्रावी । प्रमाथी । प्रवादी । प्रवासी ॥ Balamanorama ------------ **प्रे लपसृद्रुमथवदवसः** - प्रे लप । लप, सृ, द्रु, मथ, वद, वस्, एषां षण्णां द्वनद्वात्पञ्चमी । प्रे उपपदे एभ्यो घिनुण् स्यात्ताच्छील्यादिष्वित्यर्थः । Tattvabodhini ------------- **प्रे लपसृद्रुमथवदवसः** - प्रे लप । रप लप व्यक्तायां वाचि । प्रमाथीति । मथे विलोडने । Padamanjari ----------- प्रे लपसृद्रुमथवदवसः॥ रप लप व्यक्तायां वाचिऽ'सृ गतौ,' ठ्द्रु गतौऽ,'मथे विलोडने' ॥ Nyaas ----- `प्रलापी, प्रसारी` इति। `लप व्यक्तायां वाचि`(धातुपाठः-402), `सृ गतौ` (935)। `प्रद्रावी, प्रमाथी`इति। `दु द्रु गतौ` (धातुपाठः-944 945), `{मथे विलोडने-धातुपाठः-} मध विलोडने` (धातुपाठः-848)। `नाच्छादनार्थस्य` इति। न `वस आच्छादने` (धातुपाठः-1023)इत्येतस्य॥ Prakriyasarvasvam ----------------- प्रलापी प्रस्रावीत्यादि । 'प्रे लपसृ' इति माधवोक्तपाठे प्रसारी ॥ Sutra Prayogas -------------- * **विलासिनीजनः** (किरातार्जुनीयम्): `प्रे लसकत्थस्रम्भः` इति धिनुण्प्रत्ययः। * **प्रलापिनो** (भट्टिकाव्यम्): `प्रे लप` इत्यादिना घिनुण्।